योग का महत्त्व पर निबंध

Essay on Yoga: Meaning, History, and Importance

योग का महत्त्व

योग क्या है?

योग का शाब्दिक अर्थ है ‘जोड़’। इसका अभिप्राय है कि योग मनुष्य को जोड़ने का काम करता है। मनुष्य के शरीर  और आत्मा को जोड़ने का, मनुष्य के शरीर को प्रकृति से जोड़ने का।
महर्षि पतंजलि के अनुसार चित्त की वृत्तियों को चंचल होने से रोकना (चित्तवृत्तिनिरोधः) ही योग है। अर्थात मन को इधर-उधर भटकने न देना, केवल एक ही वस्तु में स्थिर रखना ही योग है।

मनुष्य की इन्द्रियाँ खुशी की तलाश में उसे हर समय बाहर की ओर धकेलती रहती हैं । जबकि खुशी उसके मन के भीतर ही है। इसी खुशी से उसका परिचय कराने के लिए भारत के ऋषियों ने इसकी खोज की। इंसान मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, गिरजाघर में भगवान को तलाश करता है जबकि भगवान का निवास उसके खुद के अंदर ही है |
जैसा कि संत कबीर के भजन से स्पष्ट है;’ मोको कहां ढूंढे रे बंदे, ना मैं मंदिर, ना मैं मस्जिद………… मैं तो तेरे विश्वास में’| योग के द्वारा वह अपने अंदर छुपे भगवान के दर्शन कर सकता है।

योग का इतिहास 

प्राचीन समय में ऐसा माना जाता था कि योग, तपस्या, साधना ; यह सभी ऋषियों के लिए बनाए गए हैं । साधु मुनि कम से कम साधनों की मदद लेकर विरक्त स्थान पर जाकर ध्यान लगाया करते थे। जब उन्हें मन की शांति का गूढ़ रहस्य मिल जाता था, तो कहा जाता था कि उनका योग सिद्ध हो गया। यह प्रक्रिया बहुत ही कठिन समझी जाती थी और कुछ विरले लोग ही इसे कर पाते थे।

आधुनिक जीवन और योग

आज योग घर -घर में आ पहुँचा है। इसे आम आदमी तक पहुंचाने का श्रेय योग गुरु बाबा रामदेव को जाता है। आधुनिक समय में लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों को ठीक करने के लिए गुरुओं ने प्राणायाम  के साथ-साथ  शारीरिक आसनों पर ज्यादा ज़ोर देना शुरू कर दिया है। क्योंकि आज के समय में मनुष्य ऐसे कामों में व्यस्त है, जिससे वह एक ही जगह पर सुबह से शाम तक बैठा रहता है। जिससे उसका शरीर अकड़ जाता है। बहुत सी बीमारियां उसके शरीर में घर बना लेती है।

इन बीमारियों से मुक्ति पाने के लिए केवल भारत ही नहीं अपितु पूरी दुनिया ने इसे अपनाया है । जगह-जगह व्यायाम केंद्र खुल गए हैं । जहां पर आसन पद्धतियां सही तरीके से सिखाई जाती हैं। किंतु मनुष्य आज यह समझ नहीं पा रहा है  कि योग का अर्थ केवल थोड़े से आसन और प्राणायाम करने से नही है।

योग और अनुशासन

योग का अर्थ अपने जीवन में अनुशासन लाना है। सुबह एक घंटा व्यायाम करने  का यह मतलब नहीं है कि अब आप कुछ भी खाएं, कभी भी सोयें, कभी भी जागे, कैसे भी चले, कैसे भी बैठे। अपने जीवन में पूर्ण अनुशासन लाना ही योग है।
  जो लोग शारीरिक रोगों से बहुत अधिक परेशान हैं, वे सभी सुबह या शाम को एक घंटा योग केंद्र या पार्कों में जाकर कसरत करते हैं। उसके बाद कुछ भी खाद्य पदार्थ ग्रहण करते हैं  तो उनका रोग कभी भी ठीक नहीं होता। और व्यायाम की सार्थकता पर संदेह करते हैं।

योग भगाए रोग

मनुष्य द्वारा आत्मिक शांति की प्राप्ति के लिए किए जाने वाले कार्यों में से योग सबसे पवित्र है। आज हम सभी अनचाहे विचारों और नकारात्मक भावनाओं से अपने आप को बचाना चाहते हैं। इसके लिए इस लाभकारी तरीके को हम अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं।

 हमें योग को अपने जीवन में पूर्णतया उतारना है। बहुत अधिक हर्ष की बात है  कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रयासों के द्वारा  यू एन ए ने  2014 में  21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में  मनाए जाने का निर्णय लिया। आज केवल भारत ही नहीं सारा विश्व  योग को अपना रहा है। इसके फायदों को समझ कर इसका लाभ उठा रहा है ।

चिंता और तनाव का अचूक इलाज

योग सांसों पर नियंत्रण, सरल ध्यान की तकनीक, और कुछ विशिष्ट शारीरिक मुद्राओं का मेल है। योग द्वारा सांसो पर ध्यान केंद्रित कर हम अपने मन को शांत रखना सीखते हैं। कुछ शारीरिक मुद्राओं और आसनों के द्वारा हम अपने शरीर में लचीलापन ला सकते हैं और अपने मन में एक दिव्य भाव पैदा कर सकते हैं। योग हमारे जीवन के हर पहलू में शामिल है।

हमारा मुख्य उद्देश्य अपने आप को मानसिक रूप से सतर्क और शारीरिक रूप से मजबूत रखना है। योग उन प्रथाओं में से एक है, जो हमारे शारीरिक और दिमागी कल्याण को प्रोत्साहन देता है। योग के इन्हीं फायदों की वजह से पश्चिमी सभ्यता के लोग बहुत बड़ी संख्या में इसके साथ जुड़े हैं।

हम अपने जीवन में कुछ उद्देश्य निर्धारित करें और इन्हें अर्जित कर ऐसा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बनाएं, जिसमें गहरी शांति और सुकून हो।

आशा करते हैं आप के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव हो

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