मेरी पहली जंगल सफारी यात्रा और जंगल सफारी का सच

मित्रों, आज के इस आर्टिकल में आप मेरी पहली जंगल सफारी का सच जानेंगे। इस आर्टिकल को आप जंगल सफारी पर आसान निबंध के तौर पर भी लिख सकते हैं। चलिए, मेरे साथ आप भी मेरी जिम कॉर्बेट जंगल सफारी यात्रा का हिस्सा बनिए और कमेन्ट में बताइए कि मेरी हिन्दी कहानी आपको कैसी लगी।

जिम कॉर्बेट सफारी | जंगल सफारी यात्रा | Jim Corbett Safari Adventure | A Visit to Jungle Safari Essay in Hindi |

प्रकृति प्रेमी होने के कारण बहुत समय से जंगल सफारी पर जाने की इच्छा थी। इस बार यह इच्छा पूरी होती दिख रही थी। मेरे चचेरे भाई की शादी जिम कॉर्बेट में बने तरंगी रिजॉर्ट में रखी गई। जैसे ही मुझे पता लगा तो मैंने मन ही मन फैसला कर लिया कि पापा को कहकर इस बार जंगल की सैर पर जरूर जाऊंगा। वहां पहुंचने के बाद अगले ही दिन मैंने होटल में पूछताछ शुरू कि जिम कॉर्बेट में जंगल सफारी कैसे करें।

“अनुभव से ही ज्ञान बढ़ता है। “

Madam RG

उसके बाद गूगल पर थोड़ी खोज करने के बाद मुझे पता लगा कि इसके लिए इंटरनेट पर ऑनलाइन ही बुकिंग करवानी पड़ती है।राष्ट्रीय पार्क वालों की जीप आकर अपने आप ही हमें वहाँ से ले जाएगी। वैसे होटल वालों ने कहा कि वे भी हमारे लिए बुकिंग करवा देंगे। लेकिन वो ज़्यादा पैसे मांग रहे थे। इसलिए मैंने ऑनलाइन पैसे जमा करके बुकिंग करवा दी और अगले दिन सुबह 6:00 का समय भी निर्धारित कर दिया। सुबह हम सभी 5:00 बजे उठ गए थे 6:00 बजे से कुछ समय पहले ही जीप होटल के दरवाजे के बाहर आ गई। हम सभी उस में बैठ कर चल दिए। जीप बहुत ही तेजी से दौड़ी जा रही थी और सुबह का मौसम बेहद सुहावना था। ऐसा लग रहा था जैसे प्रकृति ने बहुत ही पावरफुल ऐसी (AC) चलाए हुए हैं। ओपन जीप होने की वजह बार बार पीछे करने के बावजूद भी बाल संभल ही नहीं रहे थे।

जब हम नेशनल पार्क के गेट पर पहुंचे तो वहां पर एक गाइड भी आकर ड्राइवर के साथ वाली सीट पर बैठ गया। उसने हमें सुरक्षा के लिए कुछ हिदायतें दी। जंगल सफारी के लिए नियम –

  • किसी भी हालत में जीप से बाहर नहीं उतरना है।
  • जंगल में कोई भी सामान फेंकना या वहां से कुछ भी लेना मना है।
  • कच्ची पगडंडी पर निकले हुए पेड़-पौधों की टहनियों को भी छूने से मना किया ।
  • कच्चा रास्ता होने के कारण गाड़ी हिलती डुलती रहेगी। इसलिए दरवाजे की तरफ वाली जेब में मोबाइल, कैमरा या और कोई कीमती सामान रखने के लिए मना किया। क्योंकि वह जेब से निकलकर रास्ते में गिर सकता था। ऊपर से वहां पर मोबाइल में नेटवर्क नहीं आ रहा था तो मोबाइल गिरने पर उसे भी मुश्किल हो जाता है।
  • गाइड ने किसी भी जानवर के नज़र आने पर हमें शांति बनाए रखने को कहा। शोर सुनकर अक्सर जानवर जंगल में अंदर की ओर छुप जाते हैं।

पास की ही दुकान से दो पानी की बोतल और दो तीन चिप्स के पैकेट लेकर हम सभी ने अपना जंगल सफारी का सफर शुरू किया। रात भर बारिश होने के कारण कच्चा रास्ता और भी ज्यादा खराब हो गया था। ड्राइवर ने बताया कि जीप के अलावा कोई और गाड़ी उस कच्चे रास्ते पर जाएगी तो वहीं फंस जाएगी। हालांकि जीप जैसी मजबूत गाड़ी भी कई जगह बहुत हिचकोले खा रही थी। जंगल में अंदर घुसते ही प्रकृति की अद्भुत सुंदरता का अनुभव होने लगा था। वहां के पेड़ों की पत्तियाँ कुछ ज्यादा ही हरी थी। वे आकार में बड़ी भी थी। गाइड ने बताया कि यहां के जंगलों में ज्यादातर सागवान के वृक्ष पाए जाते हैं। गाइड बहुत ही समझदार और नॉलेजेबल इंसान था। उसने बताया कि सरकार अब इन सागवान के वृक्षों की संख्या कम करने पर विचार कर रही है, क्योंकि इन से कोई खास फायदा नहीं मिलता।

बीच-बीच में हम लोग शादी की बातें कर जोर जोर से हंसने और बात करने लगते थे तो गाइड हमें चुप रहने का संकेत करता था। इसलिए अब हम चुपचाप बैठ गए और मैं पीछे की तरफ जीप में खड़ा हो गया। थोड़ी देर में हिरणों का एक झुंड दिखाई दिया। हम उन्हें देख रहे थे और वे हमें। जिस प्रकार हिरण के बच्चे हमें ध्यानपूर्वक देख रहे थे, ऐसा लगा मानो वे भी किसी सवारी पर आए हैं। उनका एक छोटा बच्चा जब तक आंखों से ओझल ना हो गए तब तक हमें देखता ही रहा।

मेरे छोटे भाई ने जिज्ञासावश गाड़ी वाले से पूछा कि उसने कभी यहां असली का शेर देखा है। तो उसने बताया कि 2 दिन पहले ही उसने एक शेर देखा था। इसलिए वह हमें उसी तरफ ले गया जहां उसने वह शेर देखा था। रास्ते में और भी जीप दिखाई दे रही थी। सभी लोग इसी उम्मीद में थे कि जंगल का राजा कहीं दिखाई दे जाए।

गाइड ने हमें बताया कि इस जंगल में सभी तरह के वृक्ष हैं। आम के पेड़ पर कुछ लंगूर बंदर दिखाई दिए। दूर से देखने पर ऐसा लगा जैसे उनमें से कुछ बंदर आम खा रहे थे। गाइड ने बताया कि यह बंदर पेड़ों पर ऊंचाई पर बैठे रहते हैं और जमीन पर चलने वाले जानवरों को मांसाहारी जानवरों के खतरे से आगाह करते रहते हैं। इसलिए ड्राइवर ने हमें चुप रहने को कहा ताकि वह एनिमल कॉल (animal call) को सुन सके और हमें कोई खतरनाक जानवर जैसे कि शेर, चीता आदि देखने का मौका मिल जाए।

बारिश की वजह से रास्ते में एक जगह बहुत ज्यादा कीचड़ हो गया था, जहां पर एक जीप के पहिए धंस गए थे और वह निकल नहीं पा रही थी। दो-तीन और जीप चालक वहां पर इकट्ठा हो गए और उन सभी ने उस जीप के ड्राइवर को गाड़ी निकालने की अलग-अलग तरकीब बताई। जैसे तैसे करके वह जीप उसमें से बाहर निकल आई। इसके बाद हमारे ड्राइवर ने भी सावधानी से गाड़ी आगे बढ़ाई। तकरीबन 500 मीटर आगे जाने के बाद अचानक उसने जीप रोक दी। पूछने पर उसने बताया कि देखिए यहां पर शेर के पैरों के निशान है। इसे देखकर यह पता लगता है कि शेर अभी-अभी यहां से गया है। पहले तो उसकी बात सुनते ही लगा कि शायद शेर देखने को मिल जाए। बाद में सोचने पर लगा कि कहीं झूठ तो नहीं बोल रहा। क्या पता ये तो इनका रोज का ही काम होता हो।

इन्हें तो इसी प्रकार से आने वाले यात्रियों को लुभाना होता है। अगर शेर इस प्रकार से रास्ते पर खुला घूमेगा तो वह खुली जीप में सफर कर रहे यात्रियों पर आसानी से हमला कर सकता है। इस प्रकार जंगल कर्मचारियों की नौकरी के लिए भी बहुत बड़ा खतरा है। तभी ड्राइवर ने कहा कि देखो! उस तरफ क्या है। बहुत देर तक आँखें गड़ाने के बाद एक छोटी सी चिड़िया दिखाई दी। एक छोटी सी नीली-हरी चिड़िया। तो उसने बताया कि है यह सबसे छोटी किंगफिशर बर्ड है। जिसके नाम पर विजय माल्या ने अपनी इतनी बड़ी कंपनी का नाम रखा था किंगफिशर। मैंने उससे पूछा कि किंगफिशर में ऐसी कौन सी खासियत है जिसकी वजह से विजय माल्या ने अपनी कंपनी का नाम किंगफिशर रखा। तो उसने कहा कि उसे यह नहीं पता, और मुझे गूगल पर सर्च करने को कहा। पर वहाँ पर भी कुछ नहीं मिला। लगता है इसका जवाब मांगने तो विजय माल्या के गोवा वाले बंगले पर जाना पड़ेगा। (गोवा की यात्रा के दौरान कैब ड्राइवर ने वहाँ पर किंगफिशर के मालिक विजय माल्या का आलीशान बंगला बाहर से ही दिखाया था। )

तकरीबन एक डेढ़ घंटा जीप में सैर करके वापिस होटल आ गए। बाकी जीपों से उतरते हुए सभी लोग एक दूसरे से यही पूछ रहे थे – “क्या आपको कोई जानवर दिखाई दिया”। सभी मायूस होकर कह रहे थे कि बिना बात के समय और पैसा बर्बाद किया। इससे अच्छा तो होटल के स्विमिंग पूल में मुफ़्त में मज़ा करते और शादी वालों की मेहमान नवाज़ी का लुत्फ उठाते। अंत में अपने मन को यही कहकर समझाया कि ‘अनुभव महज वो नाम है जो हम अपनी गलतियों को देते हैं’।

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अपठित गद्यांश प्रश्न

ऊपर दी गई जिम कॉर्बेट यात्रा के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

  1. जंगल सफारी से आप क्या समझते हैं?
  2. लेख में भारत के किस राष्ट्रीय पार्क का उल्लेख किया गया है?
  3. लेखक ने जंगल सफारी के लिए सुबह का ही समय क्यों चुना?
  4. गाइड ने पेड़-पौधों को छूने से क्यों मना किया?
  5. गाइड द्वारा बताए गए कोई दो नियम लिखें।
  6. एनिमल कॉल से लेखक का क्या तात्पर्य है?
  7. लेखक को ऐसा क्यों लगा कि ड्राइवर शेर के बारे में मनगढ़त कहानी सुना रहा है?
  8. भारत में 2016-17 में विजय माल्या किस कारण सुर्खियों में थे?

यदि आप भी Essayshout पर अपनी कहानी या कविता साझा करना चाहते हैं, तो कमेन्ट में लिखें। लेखों को उचित पुरस्कार दिया जाएगा।

2 Responses to “मेरी पहली जंगल सफारी यात्रा और जंगल सफारी का सच”
  1. Sarita bansal April 29, 2022
    • Renu Gupta April 30, 2022

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