‘पहली ऑनलाइन क्लास का अनुभव’ निबंध|First Online Class Experience|

जब मैंने पहली ऑनलाइन क्लास में पढ़ाई की तो मुझे कैसा लगा? कैसे ऑनलाइन क्लास में बच्चे टीचर्स को परेशान करते हैं- मेरी पहली ऑनलाइन क्लास का अनुभव, निबंध के माध्यम से आपके सामने प्रस्तुत है |

मेरी पहली ऑनलाइन क्लास

Essay on ‘My First Online Class Experience’ in Hindi

जब 24 मार्च 2020 को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में लॉक डाउन यानी तालाबंदी की घोषणा की, मैं सुनकर स्तब्ध रह गया | मैंने अपनी 15 साल की जिंदगी में आज तक कभी इसके बारे में नहीं सुना था | हालांकि, मेरे विद्यालय की वार्षिक परीक्षा समाप्त हो चुकी थी, और मेरे पास करने को अभी कुछ ना था |

पहले तो मैंने सोचा कि 21 दिन का लॉक डाउन है, जल्दी ही बीत जाएगा | परंतु, यह तो हनुमान जी की पूंछ की तरह बढ़ता ही जा रहा था | खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था | जब मई महीना भी आ गया, तब एक दिन मेरे स्कूल से फोन आया कि आगे की पढ़ाई ऑनलाइन क्लास के द्वारा होगी |

वैसे, मैं स्मार्ट फोन और कंप्यूटर चला लेता था, पर ऑनलाइन कक्षाओं के बारे में मुझे कोई खास जानकारी नहीं थी | कक्षा अध्यापिका ने निर्धारित दिन, समय और ज़रूरी निर्देश पहले से ही भेज दिए थे | सख्त हिदायत दी कि सभी विद्यार्थी स्कूल यूनिफार्म में ही कक्षा में प्रवेश करेंगे |

मेरी पहली ऑनलाइन क्लास

निर्धारित समय से एक घंटा पहले ही उठकर मैं तैयार हो गया | मम्मी ने कहा कि, “सोचो कि तुम पहले की तरह ही अपनी असली के विद्यालय में जा रहे हो और उसी गंभीरता से बैठकर पढ़ाई करना”| घर में सभी को हिदायत थी की कोई भी शोर-शराबा ना करें |

व्हाट्सएप (Whatsapp) पर एक मीटिंग आईडी और पासवर्ड भेजा गया | मैंने ज़ूम ऐप पहले से ही डाउनलोड करके रखी थी | पासवर्ड और आईडी डालते ही मेरा सामना जाने-माने चेहरों से हुआ | इनमें से कुछ मेरी पिछली कक्षा के सहपाठी थे |और कुछ नए चेहरे भी थे क्योंकि मैं अब 10वीं से 11वीं कक्षा में प्रवेश कर चुका था | तभी सामने स्क्रीन पर एक नई अध्यापिका प्रकट हुईं |

उन्होंने सभी बच्चों को अपना परिचय दिया और हमारे बारे में पूछा | उस समय अहसास हुआ कि ज़्यादातर बच्चों की यह पहली ऑनलाइन क्लास थी | परिचय का सिलसिला खत्म होने के बाद पढ़ाई शुरू हुई|

अध्यापिका जी ने एक बोर्ड लगाया हुआ था जिस पर लिख कर वें हमें समझा रही थी | जैसे हम अपना हाथ ऊपर उठाकर पारंपरिक विद्यालय में अपने सवाल पूछते थे, उसी प्रकार ऑनलाइन क्लास में भी हाथ उठाकर अध्यापिका जी को बता सकते हैं कि हमे कुछ पूछना है| हम लिखकर या बोलकर भी अपनी शंकाओं का समाधान कर सकते हैं |

पुरानी विद्यालय में अध्यापकों को बार-बार बच्चों को चुप कराना पड़ता था, किंतु ऑनलाइन कक्षाओं में अध्यापक बस एक बार ‘म्यूट’ का बटन दबा दें तो सभी बच्चों की बोलती बंद हो जाती है अर्थात कोई बच्चा चाह कर भी नहीं बोल सकता |

दूसरे शब्दों में कहें, तो की बच्चों की आवाज स्क्रीन पर नहीं सुनाई देती है | केवल अध्यापक की आवाज सुनाई देती है | अध्यापकों के लिए बहुत ही अच्छा विकल्प है |

पहली ऑनलाइन क्लास में क्या हुआ?

कक्षा शुरू हुए अभी 20 मिनट ही हुए थे कि एक बच्चे को कुछ शरारत सूझी और उस बच्चे ने अपने कंप्यूटर की स्क्रीन से कुछ गंदे फ़िल्मी गाने लगा दिए|कोई भी ऑनलाइन क्लास के नुकसान से परिचित नहीं था| अध्यापिका को भी कुछ समझ नहीं आया कि क्या करें ? तभी देवांशी नाम की लड़की जिसे पहले से ऑनलाइन क्लास का अनुभव था, उसने टीचर की मदद की| उन्होंने परिस्थिति को संभाला और उस बच्चे को कक्षा से बाहर कर दिया, अर्थात, उस बच्चे को ऑनलाइन मीटिंग से बाहर निकाल दिया ताकि वह दोबारा कक्षा को परेशान ना कर सके |

मुझे इतना बुरा लग रहा था कि मैं बता नहीं सकता | मैडम ने उसी समय उस बच्चे के पिता को फोन कर उसकी हरकतों के बारे में बताया | उसके पिता ने माफी मांगी और वादा किया किआगे से ऐसा कुछ नहीं होगा और उसी समय सभी के सामने अपने बेटे को दो थप्पड़ रसीद करे |

ऑनलाइन क्लास के फायदे जानकार कर मुझे बहुत अच्छा लगा | मुझे कंप्यूटर और इससे जुड़ी तकनीक के बारे में जानकर बहुत हैरान हुआ | मैं यह सोच कर गर्व महसूस कर रहा था कि इंसान ने कितनी प्रगति कर ली है, कैसे ऑनलाइन कक्षा के द्वारा 40 बच्चे और एक अध्यापिका,एक साथ एक आभासी दुनिया में एकत्रित हो गए | इसके द्वारा हम अपनी पढ़ाई कर पाए |

ऑनलाइन कक्षाओं के द्वारा ही यह संभव हो पाया कि लॉक डाउन में भी हम घर बैठे ही पढ़ाई कर रहे हैं | ऐसा लगा जैसे कि विद्यालय घर में आ पहुंचा है |

हालाँकि, मेरी पहली ऑनलाइन कक्षा का अनुभव ज्यादा अच्छा ना था, जैसे कि ‘हर सिक्के के 2 पहलू’ होते हैं, उसी प्रकार ऑनलाइन कक्षाएं भी हैं | किन्तु, यह विद्यार्थियों पर निर्भर करता है कि वे किसी भी तकनीक को किस तरह फायदेमंद तरीके से उपयोग करते हैं |

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यह निबंध ‘आर्यन गुप्ता’ के द्वारा लिखा गया है |ये दिल्ली के एक स्कूल में 11वीं कक्षा के छात्र है और अक्सर इस वेबसाइट पर अपने लेख भेजते रहते हैं | अगर आप भी इन्टरनेट पर लिखना चाहते हैं तो आप अपने लेख हमे भेज सकते हैं | आपकी गलतियों को ठीक करने के बाद essayshout पर मुफ्त में प्रकाशित किया जाएगा| हिचकिचाहट छोडिये और हमे संपर्क कीजिये|

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