पहली ऑनलाइन क्लास का अनुभव निबंध First Online Class Experience

जब मैंने पहली ऑनलाइन क्लास में पढ़ाई की तो मुझे कैसा लगा? कैसे ऑनलाइन क्लास में बच्चे टीचर्स को परेशान करते हैं- मेरी पहली ऑनलाइन क्लास का अनुभव, निबंध के माध्यम से आपके सामने प्रस्तुत है ।

Essay on First Online Class Experience in Hindi ऑनलाइन क्लास का अनुभव

पहली ऑनलाइन क्लास 100-200 शब्द अनुच्छेद | कोरोना काल और ऑनलाइन पढ़ाई

मेरा नाम आरव है और मैं चौथी कक्षा में पढ़ता हूं। मुझे कंप्यूटर और मोबाइल फोन चलाना और उस पर गेम खेलना बहुत पसंद है। लेकिन मेरी बड़ी बहन कभी मुझे लैपटॉप को हाथ नहीं लगाने देती थी। लेकिन कोरोनावायरस की वजह से लॉक डाउन होने पर मुझे एक अच्छा मौका मिल गया।
मेरे स्कूल से मम्मी पापा के पास फोन आया कि अब पढ़ाई ऑनलाइन क्लास पर होगी। मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा। मैंने सारा सिस्टम जल्दी से समझ लिया और पहली क्लास के लिए जैसे ही अपना कंप्यूटर चालू किया तो मेरे सारे दोस्त और मेरी टीचर मेरे सामने थी । मुझे बड़ी हंसी आ रही थी और यह बहुत ही मजेदार था क्योंकि मैं अपने टीचर से बात भी कर सकता था, जिस प्रकार मैं व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल करके अपने दोस्तों से बात करता था।
मेरी पहली ऑनलाइन क्लास में मुझे जंगली जानवरों के बारे में पढ़ाया गया। अध्यापिका ने सभी जानवरों की बड़ी सुंदर तस्वीरें दिखाइ| यह तो पहले वाले स्कूल से भी बहुत अच्छा था क्योंकि इस पर हमें शेर दहाड़ता हुआ और हिरण भागता हुआ भी दिख रहा था| ऑनलाइन क्लास में तो पढ़ाई और भी अच्छी तरीके से की जा सकती है।
मुझे अपनी पहली ऑनलाइन क्लास में बहुत मजा आया क्योंकि इसमें स्कूल जाने की जरूरत नहीं है और मैं अपने घर में ही एसी चलाकर बैठा था| स्कूल के कमरों में ऐसी नहीं होता और पंखे भी बहुत आवाज करते हैं। ऑनलाइन क्लास में हमें सुबह जल्दी उठकर बस पकड़ने के लिए भी नहीं भागना पड़ता। मेरी मम्मी को भी ऑनलाइन PTM बहुत अच्छी लगी । मुझे अपनी पहली ऑनलाइन क्लास में बहुत मजा आया और मैं चाहता हूं कि मेरी 12वीं तक की सभी क्लास केवल ऑनलाइन ही होनी चाहिए।

पांचवी ऑनलाइन कक्षा में मेरा पहला दिन – आप यहाँ अपने अनुभव लिखवा सकते हैं।

पहली ऑनलाइन क्लास का अनुभव निबंध (500 शब्द) | कोरोना काल और ऑनलाइन पढ़ाई

जब 24 मार्च 2020 को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में लॉक डाउन यानी तालाबंदी की घोषणा की, मैं सुनकर स्तब्ध रह गया । मैंने अपनी 15 साल की जिंदगी में आज तक कभी इसके बारे में नहीं सुना था। मेरे विद्यालय की वार्षिक परीक्षा समाप्त हो चुकी थी, और मेरे पास करने को अभी कुछ ना था।

पहले तो मैंने सोचा कि 21 दिन का लॉक डाउन है, जल्दी ही बीत जाएगा। परंतु, यह तो हनुमान जी की पूंछ की तरह बढ़ता ही जा रहा था। खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था। जब मई का महीना भी आ गया, तब एक दिन मेरे स्कूल से फोन आया कि आगे की पढ़ाई ऑनलाइन क्लास के द्वारा होगी।

वैसे, मैं स्मार्ट फोन और कंप्यूटर चला लेता था, पर ऑनलाइन कक्षाओं के बारे में मुझे कोई खास जानकारी नहीं थी। कक्षा अध्यापिका ने निर्धारित दिन, समय और ज़रूरी निर्देश पहले से ही भेज दिए थे। सख्त हिदायत दी कि सभी विद्यार्थी स्कूल यूनिफार्म में ही कक्षा में प्रवेश करेंगे। मैं सोचता था कि कंप्यूटर के सामने बैठकर इन्टरनेट की मदद से ऑनलाइन पढ़ाई तो केवल विदेशों में ही हो सकती है। मैं यह सोचकर फूला नहीं समा रहा था कि ऑनलाइन क्लास के द्वारा पढ़ाई करके शायद मेरा भी दर्जा बढ़ जाएगा।

मेरी पहली ऑनलाइन क्लास

निर्धारित समय से एक घंटा पहले ही उठकर मैं तैयार हो गया। मम्मी ने कहा कि, “सोचो कि तुम पहले की तरह ही अपनी असली के विद्यालय में जा रहे हो और उसी गंभीरता से बैठकर पढ़ाई करना”। घर में सभी को हिदायत थी की कोई भी शोर-शराबा ना करें।

व्हाट्सएप (Whatsapp) पर एक मीटिंग आईडी और पासवर्ड भेजा गया । मैंने ज़ूम ऐप पहले से ही डाउनलोड करके रखी थी। पासवर्ड और आईडी डालते ही मेरा सामना जाने-माने चेहरों से हुआ। इनमें से कुछ मेरी पिछली कक्षा के सहपाठी थे। कुछ नए चेहरे भी थे क्योंकि मैं अब 10वीं से 11वीं कक्षा में प्रवेश कर चुका था । तभी सामने स्क्रीन पर एक नई अध्यापिका प्रकट हुईं।

उन्होंने सभी बच्चों को अपना परिचय दिया और हमारे बारे में पूछा। उस समय अहसास हुआ कि ज़्यादातर बच्चों की यह पहली ऑनलाइन क्लास थी | परिचय का सिलसिला खत्म होने के बाद पढ़ाई शुरू हुई।

अध्यापिका जी ने एक बोर्ड लगाया हुआ था जिस पर लिख कर वें हमें समझा रही थी। जैसे हम अपना हाथ ऊपर उठाकर पारंपरिक विद्यालय में अपने सवाल पूछते थे, उसी प्रकार ऑनलाइन क्लास में भी हाथ उठाकर अध्यापिका जी को बता सकते हैं कि हमे कुछ पूछना है। हम लिखकर या बोलकर भी अपनी शंकाओं का समाधान कर सकते हैं ।

पुरानी विद्यालय में अध्यापकों को बार-बार बच्चों को चुप कराना पड़ता था, किंतु ऑनलाइन कक्षाओं में अध्यापक बस एक बार ‘म्यूट’ का बटन दबा दें तो सभी बच्चों की बोलती बंद हो जाती है अर्थात कोई बच्चा चाह कर भी नहीं बोल सकता।

दूसरे शब्दों में कहें, तो की बच्चों की आवाज स्क्रीन पर नहीं सुनाई देती है । केवल अध्यापक की आवाज सुनाई देती है। अध्यापकों के लिए बहुत ही अच्छा विकल्प है।

पहली ऑनलाइन क्लास का मज़ेदार किस्सा

कक्षा शुरू हुए अभी 20 मिनट ही हुए थे कि एक बच्चे को कुछ शरारत सूझी और उस बच्चे ने अपने कंप्यूटर की स्क्रीन से कुछ गंदे फ़िल्मी गाने लगा दिए। कोई भी ऑनलाइन क्लास के नुकसान से परिचित नहीं था।अध्यापिका को भी कुछ समझ नहीं आया कि क्या करें ?

तभी देवांशी नाम की लड़की जिसे पहले से ऑनलाइन क्लास का अनुभव था, उसने टीचर की मदद की। उन्होंने परिस्थिति को संभाला और उस बच्चे को कक्षा से बाहर कर दिया, अर्थात, उस बच्चे को ऑनलाइन मीटिंग से बाहर निकाल दिया ताकि वह दोबारा कक्षा को परेशान ना कर सके।

मुझे इतना बुरा लग रहा था कि मैं बता नहीं सकता। मैडम ने उसी समय उस बच्चे के पिता को फोन कर उसकी हरकतों के बारे में बताया । उसके पिता ने माफी मांगी और वादा किया किआगे से ऐसा कुछ नहीं होगा और उसी समय सभी के सामने अपने बेटे को दो थप्पड़ रसीद करे।

ऑनलाइन क्लास के फायदे जानकार कर मुझे बहुत अच्छा लगा। मुझे कंप्यूटर और इससे जुड़ी तकनीक के बारे में जानकर बहुत हैरान हुआ। मैं यह सोच कर गर्व महसूस कर रहा था कि इंसान ने कितनी प्रगति कर ली है, कैसे ऑनलाइन कक्षा के द्वारा 40 बच्चे और एक अध्यापिका,एक साथ एक आभासी दुनिया में एकत्रित हो गए। इसके द्वारा हम अपनी पढ़ाई कर पाए।

ऑनलाइन कक्षाओं के द्वारा ही यह संभव हो पाया कि लॉकडाउन में भी हम घर बैठे ही पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसा लगा जैसे कि विद्यालय घर में आ पहुंचा है। हालाँकि, मेरी पहली ऑनलाइन कक्षा का अनुभव ज्यादा अच्छा ना था, जैसे कि ‘हर सिक्के के 2 पहलू’ होते हैं, उसी प्रकार ऑनलाइन कक्षाएं भी हैं। किन्तु, यह विद्यार्थियों पर निर्भर करता है कि वे किसी भी तकनीक को किस तरह फायदेमंद तरीके से उपयोग करते हैं।

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यह निबंध ‘आर्यन गुप्ता’ के द्वारा लिखा गया है ये दिल्ली के एक स्कूल में 11वीं कक्षा के छात्र है और अक्सर इस वेबसाइट पर अपने लेख भेजते रहते हैं ।

क्या आपका भी ऑनलाइन क्लास का कोई अनुभव है? हिचकिचाहट छोडिये और अपना अनुभव सबके साथ बांटिये, जैसा कि मैंने किया। धन्यवाद !

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